Friday, 28 February 2014

चलना है, तोह चलेंगे आगे

तस्वीर में छुपी वोह हसी कि कहानी
वोह उस दिन यूँह सुना पुराना एक गाना
कुछ बिखरी हुई ज़ुल्फ़ें और एक लम्बी सड़क
क्या खुद में खो जाने की ख़ुशी इसे ही कहते हैं?

वोह कुछ बिखरे हुए कागज़, यादें हैं सम्भाले
और बातें कई हवाओं में अभी भी सुनायी देतीं हैं
फिर वोह रास्ता जिसपे चला करते थे यूँह
क्या उसमें खो जानें कि ख़ुशी इसी को कहते हैं?

एक सूना सन्नाटा, कुछ शोर कुछ लड़ाई
वोह चुपके से शांति का यूँ चले आना
कुछ हंसी के ठहाके, रोना और रुलाना
क्या पल में ठहर जाना इसी को कहते हैं?

चलना है, तोह चलेंगे आगे
रुकने को आखिर किसने कहा है
पर पल पल साथ रहती जो हैं बातें
उन्हें जी लें पल पल इसी में मज़ा है 

Thursday, 27 February 2014

बचपन की यादें

वोह गीली मिटटी कि खुश्बू
बारिश में झूम के नाचना
वोह हसी से गुदगुदाते लम्हे
और बस, यादें हैं अब बाकी 

Wednesday, 26 February 2014

आँखों के सागर

कुछ पल यूँह आज भी कैद हैं इन आखों में 
जैसा ठहरा हुआ है वक़्त कहीं
कभी रुकने का जब सोचती हूँ 
कदम ही साथ नहीं देते 

Kuch pal yunh aaj bhi kaid hain in aankhon mein 
Jaise thehra hua hai waqt kahin..
Kabhi rukne ka jab sochti hoon, 
Kadam hi saath nahi dete! 

- Diary of an Oxymoron

Tuesday, 25 February 2014

रात

अँधेरी रात की गहराई में 
जब 
ढूंढ़ने निकलो किसी पुरानी कहानी की सच्चाई 
तब
सन्नाटा मार डालता है 

-Diary of an Oxymoron

Sunday, 23 February 2014

नैना

आंखों में जो है समंदर
उसमें डूबा हुआ है सबका व्यक्तित्व
बस देखने का नजरिया चाहिए
तभी तो जान पाओगे ज़िंदगी कि सचाई 

सोये रहोगे कब तक

कौन रोक पायेगा उस ज्वाला को
जो शुरू हुई थी एक चिंगारी कि तरह
पर चली है आज जलाने को यह दुनिया
किये बिना किसी रीती रिवाज़ कि परवाह

कौन रोक पायेगा उस तूफानी नदी को
जो शुरू हुई थी एक हिमनद के ज़रिये
पर आज चली है तबाह करने
पितृसत्ता कि खोखली जड़ों को

कौन रोक पायेगा उस चक्रवात को
जो शुरू था हवा के झोंके से
पर आज चली है मिटाने लिंग भेद को
लोक सत्ता का सही मतलब बताने

कौन रोक पायेगा, कौन रोक पायेगा
जब शुरू हो जायेगा एक परिवर्तन इस भ्रमांड में
जब जाग जायेगी हर वो सोई भावना
बदल जायेगी हर प्रथा, हर रसम

शुरू हो चुकी है यह कहानी
शायद अभी नहीं सुनी है तुमने
जब चलेगा संपूर्ण बदलाव का चक्र
सोये नहीं रेह पाओगे

Saturday, 22 February 2014

सवाल-जवाब

हर नज़र में एक सवाल है
शायद अभी जवाब मिलना है मुश्किल
पर जवाब कि किसे है परवाह
मिले नहीं तभी तोह सवाल का मज़ा है